Wednesday, September 26, 2018

निर्भया-क्या वाकई जीत गई? Comments

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न साथी न संगी कोई
न सखी न सहेली,
उस रात वह थी
अकेली ही रोई,
...
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Tanya Roy
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Rajnish Manga 26 September 2018

यदि आप मुनासिब समझें तो मेरी कविता 'आपकी निर्भया' भी पढ़ें और अपने विचारों से अवगत करायें. आपकी कविता से कुछ शब्द: - निर्भया-क्या वाकई जीत गई? बेटियाँ चाहे एवरेस्ट फतह करे या चाँद इससे कुछ फर्क ना पड़ता तो शायद मैं कह पाती हाँ- निर्भया- आज वाकई जीत गई।

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Rajnish Manga 26 September 2018

आपने निर्भया सहित उन सभी बच्चियों की ओर से जिन्हें वहशियों की दरिंदगी का शिकार होना पड़ा है, देशवासियों और देश के कर्णधारों से कलेजा चीर देने वाला प्रश्न किया है, जिसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है. सख्त क़ानून और सज़ा-ए-मौत का डर भी उद्दंड व्यक्तियों के दुस्साहस पर अंकुश नहीं लगा पा रहा. उल्टे, क़ानून के रखवाले भी कई बार इन अपराधों में लिप्त पाए गए हैं. धन्यवाद.

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Tanya Roy

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