दुनियाँ गधों की कर्जदार है Poem by Upenddra Singgh

दुनियाँ गधों की कर्जदार है

गधा मूर्ख होता है! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !
कौन करता ये बकवास? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ?
अरे, अक्ल के दुश्मनों
आदरणीय गधे जी का
मत करो उपहास।
गधा ढोता है
बड़े-बड़े गट्ठरों का भारी-भरकम भार
और ऊपर से
सहता है डंडों की असहनीय मार।
अगर नहीं सहता
और तुम्हारी तरह लड़ने को हो जाता तैयार
चला देता दुलत्ती का अचूक हथियार
तो फिर
होता खून-खराबा बढ़ता मौत का व्यापार।
मगर गधा ‘गनबोट डिप्लोमेसी' वाले
‘अंकल सैम' से कहीं अधिक समझदार है।
वह प्रबुद्ध है, दूरदर्शी है
अहिंसक है और कर्मनिष्ठ है
आदमियों के लिये प्रेरणा का स्रोत हैं
महानता से ओतप्रोत है।
यह बेहद समझदार है।
आदमी पर इसका बहुत उपकार है।
गधा समूची दुनिया के प्रति वफ़ादार है।
अगर सहिष्णुता/सहनशीलता के सन्दर्भ में बात करें
इसके गधेपन पर दृष्टिपात करें
तो हर आदमी पर कुछ न कुछ उसका उधार है।
दुनियावालों!
जरा कान खोलकर सुन लो
ये समूची दुनियाँ गधों की कर्जदार है.
इनको देखो समझो और ख़ुद से पूछो -
देश दुनियाँ और मानवता के प्रति
कौन कितना वफ़ादार है? ? ? ? ? ? ? ? ?

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Azamgarh
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