खाक में मिल गए सपने Poem by Upenddra Singgh

खाक में मिल गए सपने

बापू!
वही राजनीति
जिसे तुमने नागिन के रूप पहचाना था
जिसे देश के लिए घातक माना था
जिससे देश को बचाना था।
जिसे सुधारने का तुमने भगीरथ प्रयत्न चलाया था।
जिसके लिए खून-पसीना बहाया था।
हाँ,
जिसे रामराज सरीखे साध्य का साधन बनाया था।
हाँ वही राजनीति
तुमको अपनी जागीर समझनेवालों की पीठ पर बैठकर
अपने असली रूप में आ गई।
और पूरे देश पर गज़ब ढा गई।
तुमको तो उसने
वोट के बाज़ार का 'हॉट केक' बना दिया है
और तुम्हारे सत्य अहिंसा और शुचिता सरीखे मूल्यों को
मौत की नींद सुला दिया है।
'फूट डालो और शासन करो' की 'नीति'
अब भी जारी है
पूरे देश में कहर बरपाने की भयंकर तैयारी है।
वो नागिन तुम्हारे सपनों पर बहुत भारी है।
कदाचित् कुछ ऐसी ही नियति हमारी है।
कभी 'वो'
कभी अंग्रेज
तो कभी अपने
खाक में मिल गए सब सपने।

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Azamgarh
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