तेरे शहर में Poem by Upenddra Singgh

तेरे शहर में

क्या हुस्न का सुरूर है तेरे शहर में।
हूर कोहिनूर 'सुमन'तेरे शहर में।
यूँ तो मेरी निगाहों पर मेरे ईमान का पहरा है।
वर्ना जर्रे-जर्रे में तेरा नूर है तेरे शहर में।

Saturday, December 29, 2018
Topic(s) of this poem: city
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Upenddra Singgh

Upenddra Singgh

Azamgarh
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