प्यार क सिंगार गोरी ना Poem by Upenddra Singgh

प्यार क सिंगार गोरी ना

हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.
संघवे-संघवे माई - दादा क दुलार गोरी ना.


सब ह आपन जिम्मेदारी लड़िका दादा महतारी.
के के मझधार छोड़ी आवा पार हो उतारीं.
बिना तोहरे ई ज़िनीगिया पहाड़ गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.



नेहियाँ के छंहियाँ माई हमके हो जियवलय.
छतिया निचोर आपन दूधवा हो पियवलय.
रोम-रोम हउवे ओकर करजदार गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.




माई-दादा दिहलयं हमके सुखवा क दिनवाँ.
कइसे उनसे मुँहवा मोड़ब करब हो बेदिनवाँ.
मति चलावा हो करेजवा पर कुठार गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.



लोगवा हमके हो दुत्कारी दुअरा चढ़ी के देइ गारी.
हम त मेहरबस कहाईब गऊवाँ हमके ताना मारी.
हो जाई ई जिनीगिया तार-तार गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.



फूँकि-फूँकि कदम रखा जरत बा जमनवाँ.
कोंखिय क जनमल ना मानंय अब कहनवां.
के हो बनिहंय तब आपन पतवार गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.



बचवा देखिहैं गुनिहैं सीखिहैं इहे करनी सगरी.
सोचा हमनीं क बुढ़ापा फिर हो कईसे गुज़री.
जियल जो जाई जिनीगिया दुशवार गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.


उनक मनवाँ जब जुड़इबू दुलहिन लायक तू कहइबू.
हीरवा-सोनवा से मँहगी अशिषिया उनक पइबू.
छाई जिनगी में तोहरे उजियार गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.



नेहियाँ के छाँव ‘सुमन' खेलिहैं हो ललनवाँ.
हुलसी घरवा-दुअरवा चहकी ओसरा-अंगनवाँ.
दे दा हमके हमार दुनियाँ उधार गोरी ना.
हमके चाही तोहरे प्यार क सिंगार गोरी ना.

Saturday, November 10, 2018
Topic(s) of this poem: love
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Azamgarh
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