जड़वा में छूटेला पसीनवाँ हो रामा.
बीती कइसे पूस क महीनवाँ हो रामा.
रचि-रचि सियलीं लगलीं हो पेवना.
तबहूँ ना पुर पड़े ओढ़ना-बिछवना.
उड़ी गइलें मन क चयनवाँ हो रामा.
बीती कइसे पूस क महीनवाँ हो रामा.
हहराला पछुवाँ हाड़ हो कँपावेला.
निरबसिया अबे से करेजा सिहरावेला.
पतवा पे हउवे परनवा हो रामा.
बीती कइसे पूस क महीनवाँ हो रामा.
नाहिं ह शहरिया आपन हो डेरा.
नाम क बनल हउवे रैन बसेरा.
लउके न कवनो ठिकानवाँ हो रामा.
बीती कइसे पूस क महीनवाँ हो रामा.
ठिठुरलं बचवा कहेलं मोरी माई.
अबहीं त आवेके बा पुसवा कसाई.
चिंता में पड़ल ह परनवा हो रामा.
बीती कइसे पूस क महीनवाँ हो रामा.
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem