बेटा बेटी एक समान Poem by milap singh bharmouri

बेटा बेटी एक समान

बेटी- बेटा एकसमानयूँ तो
लोगसबकेसामनेकहतेहैं।

परचोरीछुपकेटोने -टोटके
नजानेक्या - क्या वो करते है।

लिंग भेद परउनकीदृष्टि से
शायद देवों को भी हैरानी होगी।

देवी के मंदिरमें जाकर नासमझ
देवी से भी बेटा ही मांगा करते हैं।

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