रास्ता ग़र
मंजिल बन जाए
जीवन की आपाधापी में
जोड़ घटाना और बाक़ी में
जटिल तंत्र की आभासी में
सपनों की ताकाझाकीं में
रस्ता ग़र मंज़िल बन जाए
जीवन बहुत सरल बन जाए
अगर पेट में भूख हो साथी
रोटी, चटनी, प्याज है काफ़ी
नहीं ज़रूरी ट्रंक भरे हों
दो जोड़ी कपड़े हैं काफ़ी
सही सोच सम्बल बन जाए
जीवन बहुत सरल बन जाए
समय जरा विपरीत खड़ा हो
इच्छाओं का पेट बड़ा हो
दर्प दंश से गिरा पड़ा हो
और अरि भी उधर अड़ा हो
इनसे अगर रार ठन जाए
जीवन बहुत सरल बन जाए
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