हम तुम्हे फिर मिलेंगे, Poem by Mohan Tripathi

हम तुम्हे फिर मिलेंगे,

हम तुम्हे फिर मिलेंगे,
जख्म दिलों के बैठ कर सिलेंगे,
वही नूर वही आवाज
वही ख्वाब वही गुलाब
हँस कर फिर खिलेंगे!
हम तुम्हे फिर मिलेंगे! •••

वही सावन की घटाये,
वही महकती हवायें,
आशमान मे छा जाएँगी!
फिर तुम्हे भा जाएँगी!
हम कभी न तरसेगें!

बादल रिम- झिम फिर बरसेगें!
हम तुम्हे फिर मिलेंगे! •••

दिल के फूल खिलेंगे,
मिल कर फिर हँसेगे!
सो कर जागेंगे,
हम तुम्हे फिर मिलेंगे! •••

~ मोहन त्रिपाठी

हम तुम्हे फिर मिलेंगे,
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