दर्द से रिश्ता बना के लगा कि,
दिल का असल मतलब क्या है।
ज़िंदगी गुजरते ही लगा कि,
वक़्त को वक़्त की कद्र क्या है।
अफ़सानों के पैमाने में मन के
अल्फ़ाज़ बदलते देखा है
हालात के बदलते ही लगा कि
जज़्बात को जज़्बात की कद्र क्या है
अरमानों के बहकावे में
भाग रही सारी दुनिया
असल में नक़ल और नकल में असल
इंसान को इंसान की कद्र क्या है
- सुरभि सिंह
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