यौवन की अहसास जगा दू तुझमे Poem by Tulsi Shrestha

यौवन की अहसास जगा दू तुझमे

यौवन की अहसास जगा दू तुझमे
चुमकर इन गुलाबी होठों को
केैद कर लू तेरी सासों की खुशबू को
जाम तेरी दो नशीली नयनों का
पिकर बुझा दू, प्यास दिल का ।

मदहोश बना दू तुझे
बजाकर बीन, झुम झुमकर ।
नाचू मैं प्यार में लहराती हुई
तेरी घना जुफ़ो के संग ।

तेरी दिल की महफिल को
सरगम से सजा दू मैं ।
खोया खोया नीली आसमान को
ईद्रधनुष से रगं दू मैं ।

मचलती हुई तेरी यौवन को
बोल तू, लगा दू मैं आग ।
बरसती सावन को मैं बोलू
अब घरती प्यासा कभी ना रहे ।

भवरा बनकर मैं गुनगुनाऊ
तू झूमो मेरे संग, पुष्प बनकर।
मै समाजाऊ तुझमे, बनकर तेरी धड़कन
तू बन मेरी सासों की खुशबू ।
राग रस बनकर नव दीप जला दू
झुककर धरती को, मैं थाम लू ।
दुनिया देखे, संंगम दो आत्त्मा का
आरोह अवरोह दो यौवन का ।
रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
composed by Tulsi Shrestha
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Sunday, March 31, 2019
Topic(s) of this poem: love
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