बदरवा बरस झमाझम पानी
धधकी धरती हवन कुण्ड भई,
तरस रही ज़िन्दगानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
धूमिल आस हुई जीवन की
लूट गई सब शोभा मधुबन की,
झुलस गई चुनर धानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
नदिया प्यासी पोखर प्यासा
ताल-तलईया की तूं आशा,
तूं अति महान बड़दानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
आकुल-ब्याकुल बछरू गईया
आग बरस रही दईया रे दईया,
कब ठुमकेगी बदरी सुहानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
जल बिनु तड़पे सोन मछलिया
गरज-तरज छिप जाए तूं छलिया,
क्या करने को है तूने ठानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
चातक मन मोरा तोहें पुकारे
माँग-माँग जीवन जल हारे,
भूल गए सोना-चानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
लता-कुञ्ज वन तन-मन उपवन
तुम बिन सूना जन-मन जीवन,
दे-दे जीवन की खोई रवानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
दे नदिया की कल-कल छल-छल
दे-दे मेघा दे जीवन-जल,
सारी दुनियाँ है तेरी दीवानी
बदरवा बरस झमाझम पानी.
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