चुनाव आ गए हैं Poem by Upenddra Singgh

चुनाव आ गए हैं

रावण में रामजी के भाव आ गये हैं.
लगता है फिर अब चुनाव आ गए हैं.


उनको तलब लगी तो फिर हाल क्या हुआ?
दिल्ली से दौड़े - दौड़े नंगे पाँव आ गए हैं.


जिनको भरम था वो हैं भगवान हमारे.
भीख माँगने वो मेरे ठाँव आ गए हैं.


बोलो तुम्हारे साथ जी व्यवहार क्या करें?
अब तो हाथ मेरे भी दाँव आ गए हैं.


इस लोकतंत्र की महिमा बड़ी है न्यारी.
वो महलों को छोड़ झोपड़ी की छाँव आ गए हैं.


फिर साधुओं सा बाना फिर साधुओं सी बोली.
राजधानी के रहवइये सब गाँव आ गए हैं.

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Azamgarh
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