झंडे को सम्मान मिला है Poem by Upenddra Singgh

झंडे को सम्मान मिला है

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मस्तक ऊँचा हुआ हिन्द का
आज देश को मान मिला है.
संविधान को न्याय प्रतीक्षित
झंडे को सम्मान मिला है.



आज हिमालय के आँगन में
लोकतंत्र फिर जागा है.
ना समझे अब पाक कोई कि -
ये कश्मीर अभागा है.
सुलग रही घाटी को अब
देवों का वरदान मिला है.
मस्तक ऊँचा हुआ हिन्द का
आज देश को मान मिला है.



नहीं खैर है अब घाटी में
दहशतगर्दों गद्दारों की.
अब दिल्ली इतिहास लिखेगी
इंसानी अधिकारों की.
जन-मन की आकांक्षा को
अप्रतिम प्रतिदान मिला है.
मस्तक ऊँचा हुआ हिन्द का
आज देश को मान मिला है.



बारूदी अंगारों पर अब
केशर की क्यारी लहरेगी.
ऋषि-मुनियों की पुण्य-भूमि पर
शांति ध्वजा प्यारी फहरेगी.
जनमानस के मानचित्र को
अभिनव हिंदुस्तान मिला है.
मस्तक ऊँचा हुआ हिन्द का
आज देश को मान मिला है.



झेलम की पुलकित लहरों ने
दिल्ली का आभार जताया.
दुष्ट पाक के सिर पर मानो
महावज्र है घहराया.
आज़ मनुजता को घाटी में
समृद्धि का विज्ञान मिला है.
मस्तक ऊँचा हुआ हिन्द का
आज देश को मान मिला है.



सुन रे पाक दुष्ट पापी
अब ना तेरी दाल गलेगी.
दूल्हा बनकर स्वर्ग हड़पने
की साजिश अब नहीं चलेगी.
छप्पन इंच के सीने वाला
हमको वीर जवान मिला है.
मस्तक ऊँचा हुआ हिन्द का
आज देश को मान मिला है.



रावी सिन्धु चिनाब दे रहीं
इक-दूजे को आज़ बधाई.
लाल चौक पर मेरा भारत
‘सुमन' ले रहा है अंगड़ाई.
भारत की चिर-अभिलाषा को
सम्प्रभुता का भान मिला है.
अजर-अमर शाश्वत हो जाये
जो नेतृत्व महान मिला है.
मस्तक ऊँचा हुआ हिन्द का
आज देश को मान मिला है.

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