Ajay Srivastava

Gold Star - 11,191 Points (28/08/1964 / new delhi)

लक्ष्मी जी - Poem by Ajay Srivastava

लक्षय सभी का आप सिद्ध करने वाली|
क्षमता है सब को अपनी और आकर्षित करने की|
मन को कर्म करने के लिए प्रेरित करने वाली|
इनसे प्रेम समस्त जन मानस और यही सभी को संतुष्टि दिलाने वाली है|
जीवन को गतिमान बनाने वाली|

लगातार चलनाे का स्वभाव रखने वाली|
क्षर्मिक हो या हो धनवान सभी के पास रहने वाली |
महत्व और मान जो इनको देता उनके जीवन को सफल बनाने वाली है|
ईन्ही से समस्त विश्व की अर्थव्यवस्था की पहचान|
जी हॉ यही है सभी को प्रिय है|

लक्ष्मी जी का सम्मान ले जाता सबको प्रगति की और|
लक्ष्मी जी का दुर्पयोग दे देता है विनाश को नि मञण|

Topic(s) of this poem: god


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Poem Submitted: Saturday, January 16, 2016



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