' गुरुगान यशगान '

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अ से ज्ञ तक का ज्ञान दिया,
हर गलत बातों को माफ़ किया,
गीली मिटटी को आपने आकार दिया,
मेरे हर एक सपने को साकार किया ||

वे सदेव मेरे उर - तल में,
मेरे संग वे 'यश'- पल में,
वे 'राहुल' जीवन की कल - कल में,
मेरे संग वे हर पल में ||

वे विद्या का है भंडार,
वे ज्ञान का है आपार,
करता हुँ उनका तहे दिल से सम्मान,
और उनको मेरा कोटि-कोटि प्रणाम ||

-राहुल व्यास

Saturday, September 20, 2014
Topic(s) of this poem: teacher
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
यह कविता मैंने अपने गुरु श्रीमान यशवंत सिंह जी चौहान ' राष्ट्रीय ओज कवि ' राजगढ़ को समर्पित की है | जिस तरह से मै अपने गुरु का सम्मान करता हुँ एवं और उन्हें मेरे जीवन की सफलता का श्रेय देता हूँ|
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