सतरंगा जीवन Poem by Shobha Khare

सतरंगा जीवन

डरो न कभी निराशा से
घिरो न कभी हताशा से
आशा के दीप जलाओ
नित नया गान तुम गाओ I


बहती सुख -दुख की गंगा
यह जीवन है सतरंगा
रंगो से प्रीत बढाओ
नित नया गान तुम गाओ I

सुख दुख है आते जाते
अपनी भूमिका निभाते
रोओ मत, हंसो हँसाओ
नित नया गान तुम गाओ II

Thursday, August 13, 2015
Topic(s) of this poem: life
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