इस बार होली जमकर खेलेंगें... Poem by Sandhya Jane

इस बार होली जमकर खेलेंगें...

Rating: 5.0

साल भर घंटो पानी बहाकर कार के साथ सड़क न धोयेंगे
हर घर में हर एक को जरुर समझायेंगें की -
बहते नल के निचे बर्तन और कपड़ा न कभी धोयेंगे;
और होली के समय 'सेव वाटर' का झुट नारा न लगायेंगे,
और इस बार होली जमकर खेलेंगें...

दोस्तों, ये 'ड्राई-व्राई' होली वाली सोच बकवास है,
क्योंकि होली रंग और पानी का त्यौहार है;
इस बार पिचकारयाॅ छुट्टी नहिं मनाएँगे,
क्योंकि लाखों लीटर पानी हम साल भर बचाएगें,
और इस बार होली जमकर खेलेंगें.…

ओ, भैया, कभी ये विज्ञापन भी दिया करो -
इस बार ईद पे छुरीयाँ छुट्टी मनाएगें
या कि्समस में पेड़ नहि काटायेंगे;
क्योंकि समान 'आचार विचार' कि सोंच में सबको गर्व महसूस करायेंगे,
और इस बार होली जमकर खेलेंगें.…

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
Against misleading environmental campaign to kill Indian culture and festivals...
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 12 March 2020

जन-जागरण की भावना से प्रेरित कविता. धरती और मानव के बीच संतुलन बनाये रखने की बहुत जरुरत है. बहुत अच्छा लिखा गया है. धन्यवाद.

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