सितम की तरह Poem by Shobha Khare

सितम की तरह

तुम मेरे दिल मे रहो दम की तरह
दम न सही हसरत -ओ - गम की तरह
गैर के आगे वो मेरे हiल पर
लुत्फ* भी करते है सितम की तरह II

Saturday, June 6, 2015
Topic(s) of this poem: life
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