साँसो की सरगम Poem by Shobha Khare

साँसो की सरगम

रूप तेरा, खुश्बु तेरी
तू ही तू मुझमे समाया Ii
है सजाया तन ये मैंने
मन मे ही तुझको बसाया ii

मन का आँगन सूना -सूना
सूना है ये दिल का कोना ii
आग लगी मेरे मन मे
देखा जबसे रूप सलोना II

भीगी भीगी पलके मेरी
बिखरी बिखरी अलके मेरी i
याद करती है तुम्हें ही
साँसो की सरगम ये मेरी II

Sunday, July 19, 2015
Topic(s) of this poem: life
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