रूप तेरा, खुश्बु तेरी
तू ही तू मुझमे समाया Ii
है सजाया तन ये मैंने
मन मे ही तुझको बसाया ii
मन का आँगन सूना -सूना
सूना है ये दिल का कोना ii
आग लगी मेरे मन मे
देखा जबसे रूप सलोना II
भीगी भीगी पलके मेरी
बिखरी बिखरी अलके मेरी i
याद करती है तुम्हें ही
साँसो की सरगम ये मेरी II
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