मौसम Poem by Shobha Khare

मौसम

मौसम प्यारा हो गया, धवल -दूधिया भोर
पूरी प्रकृति नहा रही, शबनम से हर ओर I
शबनम से हर ओर, पास का नहीं दिखता
पसरी शांति आज, है कोई नहीं चीखता I
बादल -बादल आए है, खूब करी बरसात
कहीं कहीं ओले गिरे, हुई घाति -प्रतिघात I
हुई घाति -प्रतिघात, कहीं ये फसले मरती
कहीं -कहीं पर मगर, रंग फसले भरतीं II

Wednesday, August 5, 2015
Topic(s) of this poem: life
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