किसी के मुस्कुराने से, कोई क्यों रूठ जाता है Poem by Abhishek Omprakash Mishra

किसी के मुस्कुराने से, कोई क्यों रूठ जाता है

किसी के मुस्कुराने से, कोई क्यों रूठ जाता है
हमारे दिल का ये शीशा, तभी फिर टूट जाता है
न जाने क्या लिखा है, हाथ की झूठी लकीरों में
जो अक्सर साथ होता है वही फिर छूट जाता है
'कवि अभिषेक ओमप्रकाश मिश्रा '

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