जोगिरा - भाग 1 Poem by Upenddra Singgh

जोगिरा - भाग 1

वजह कौन सी क्यों कुँवारे उमर हो रही पार।
आस्तीन चढ़ा के झट ओ बोले मोदी जिम्मेदार ।
जोगिर सा रा रा रा..............

दिल पे डाका डाल रही है लल्लन टॉप वो गोरी।
नेताओं के चैन लूटती राजनीति की छोरी।
जोगिरा सा रा रा रा.........

तूतक-तूतक तूतिया आई लव यू।
संभल रहना कहीं न कह दे वो तुमको मी टू।
जोगिरा सा रा रा रा........

लगी पीठ पर घाव और वो सर पर मारें लोथा।
जनसंख्या जब तक उफान पर यह विकास है धोखा।
जोगिरा सा रा रा रा............

वो कहते हैं मिलजुलकर हम पी एम अपना चुन लेंगे।
लंका में सब बावन गज के खाक किसी की सुन लेंगे।
जोगिरा सा रा रा रा...........

डपटी नौकरी प्राइवेट ना करन तुम तकरार।
वर्ना दिन में दिखलाउं मैं तारे कई हज़ार।
जोगिरा सा रा रा रा...........

शीत-ताप बारिश सहते हैं रामलला सरकार।
बहुमत दी सरकार बनाई फिर भी तुम लाचार।
जोगिरा सा रा रा रा..............

तन से कपड़े खिसक रहें है विवश हुई फिर नारी।
बालीवुड बन गया दुशासन चीरहरण है जारी।
जोगिरा सा रा रा रा.............

जिससे मिलते नोट हैं उनको वो उनके ही हो जाते हैं।
ये वकील सब देखो भईया फिर भी साहब कहलाते हैं।
जोगिरा सा रा रा रा रा.......

राजनीति ठहरी हरजाई करती नयन मटक्का।
देख के उसकी कारस्तानी 'सुमन' है हक्का-बक्का।
जोगिरा सा रा रा रा...........

माँ बेटी और बेटा मिल सब पर हुकुम चलायें।
Congress में लोकतंत्र फिर बाप-बाप चिल्लाये।
जोगिरा सा रा रा रा............

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Azamgarh
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