🔱 श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति 🔱
जयति महाशक्ति स्वरूपा, शिव-हृदय-विहारिणी,
प्रलय-काल-नृत्यातुरा, दनुज-वंश-विदारिणी।
डमरू-ध्वनि-संग थिरकती, चरण-चाप-कंपित-धरा,
त्रिलोकी-वंदिता माता, आदि-शक्ति करुणामयी, जगदुद्धरा।
रण-चंडी रूप धरे, नयन-अग्नि झलकावती,
मुंडमाल कंठ सोहे, खड्ग-हस्त चमकावती।
तांडव-लय-बद्ध पग, घुँघरू रुनझुन बाजत,
भक्त-रक्षण-हेतु माँ, विकराल रूप साजत।
सौम्य रूप गौरी तुम, तुम्हीं महाकाली विकट,
शरण आए भक्त के, संकट हरतीं तुम तुरंत।
सृष्टि-स्थिति-विनाश की, तुम्हीं आद्या मूल हो,
नमन तुमको जगदंबे, तुम ही सिद्धि-अनुकूल हो।
हुंकार उग्र प्रचंड माते! शत्रु-दल थर-थर काँपता,
तेज ओजस्वी देख तेरा, काल भी पग नापता।
अरि-कंठ-विदारण खड्ग चमके, असुर-मस्तक डोलते,
जो बढ़े सुत की ओर कुदृष्टि, प्राण उसके बोलते।
परम पावन सौम्य गौरी! अंचल में अमृत धार है,
'बाल कृष्ण' की पुकार पर, बहती करुणा अपार है।
ऋद्धि-सिद्धि नव-निधि दे, मिटातीं सब क्लेश को,
शीश नवाए 'मिश्रा' माँ! हर लो सकल द्वेष को।
॥ इति श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति सम्पूर्णम् ॥
~बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |
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