Raghawendra Pandey

Rookie - 132 Points (10/02/1983 / Varanasi)

देश युवाओं से बदलेगा - Poem by Raghawendra Pandey

देश नहीं बदलेगा शहरों की गलियों से
ऐश-कैश से या फिर मस्ती रंगरलियों से
रहते जहाँ रथी पौरुष के
उन सब गाँवों से बदलेगा

देश न बदलेगा फूलों के हारों से
शीतल पवन सुगंधित मंद बयारों से
आँधी बनकर जो उमड़ेंगी
उन्हीं हवाओं से बदलेगा

देश न बदलेगा अब अबला होने से
अस्मत लुटकर भी क़िस्मत पर रोने से
बिजली बनकर जो कड़केंगी
उन सबलाओं से बदलेगा


देश न बदलेगा तूँ-तूँ, मैं-मैं करने से
बदलेगा तो सही-ग़लत को तय करने से
पाक़-साफ व्यक्तित्व चुनें जो
उन्हीं चुनावों से बदलेगा

Topic(s) of this poem: art


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Poem Submitted: Tuesday, March 10, 2015



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