ज्ञान का पेड़ Poem by Dr Aftab Mujahid

ज्ञान का पेड़

बाग़! में हम सब जाते हैं।
इल्म का पेड़ लगाते हैं।।

वर्षों मेहनत करते हैं।
क़द ख़ुद अपना बढ़ाते हैं।।

वो जो सेवा करते हैं।
मेवा वो ही पाते हैं।।

टीचर प्यारे माँ और बाप।
हम पर जान लुटाते हैं।।

सब की दुआएँ पा पाकर।
पेड़ पे फल आ जाते हैं।।

भाई बहनें माँ और बाप।
मिल जुल कर सब खाते हैं।।

डॉ० आफ़ताब मुजाहिद

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
Emphasising The Importance Of Knowledge And The Gratitude That A Person Should Have Towards Got And Also The Family Unity
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