वो ख़त Poem by Anand Prabhat Mishra

वो ख़त

वो ख़त
जो तुमने लिखा था
'आप बहुत अच्छे हो हमेशा मुस्कुराते रहना'
देखो मैं खुश हूं मगर
उजड़ गए खुशियों भरे आशियां
दब गए तुम्हारे झूठे वादों के दीवारों तले
वो ख़त
जो तुमने लिखा था
पढ़ कर जो मुझे
दर्पण से बातें करने को उकसाया किया था
वो पल परछाई की तरह मेरे पीछे-पीछे चलती है
जिसका वजूद भी उसी तरह अतित में दफ़न हो गया
जिस तरह
वो ख़त
जो तुमने लिखा था
आज पढ़ कर हंसी आएगी मुझे
बेशक तुमने मुझे रोने नहीं दिया कभी
ना जाने कितनी तारीफें थी
जिसका साकार होना मेरे व्यक्तित्व को
तुम्हारी तरह बना देता
अच्छा हुआ जो ना हुआ बस गुम हुआ
वो ख़त
जो तुमने लिखा था

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