इंतजार है औरों का Poem by Anant Yadav

इंतजार है औरों का

कहीं प्यार तो कहीं टकराव
कहीं घमंड तो कहीं विनम्रता
कहीं अमीर तो कहीं गरीब
कहीं मिली प्रशंसा,
तो कहीं धिक्कार मिली,
कहीं लोग खुश दिखें मुझे,
कहीं दुख से पीड़ित असहाय पड़े,
किसी को सहा नही,
कहीं मिली दुआ सच्चे मन से,
तो आया मन में करने को कुछ काम
बनाए पराए रिश्ते अपनो से,
कहीं पराए अपने बन गए,
था खड़ा कीचड़ में जब था,
देख बहुत खुसमदे चेहरे,
लिए हाथ में खंजर घूमे,
हाथ क्यों मन में भी तो खंजर है,
भोगा पीठ पर बुराई का खंजर
क्या करें
भाव से है प्रभाव मिला
रखी सुध्दता मन में,
तो शुद्ध शीतल जल मिलेगा,
सिद्ध होंगे काम सभी,
कहीं न ऐसा मंजर मिलेगा।

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