मेघ से आई बारिश ही हूं Poem by Anant Yadav

मेघ से आई बारिश ही हूं

असमा से टपकी हूं तो,
बारिश ही हूं
पूछो मत बड़ी मेहनत से आई
बारिश ही हूं,
बूंद बूंद गिरता पत्थर पे,
टप टप की आवाज है आती
पड़ते पाव में छाले हैं,
कहने को तो बहुत नाम है
मेघ से आई
बारिश ही हूं
लगा आज कल ठीक ही
फिर से आई बारिश हुं
मिली नदियों में, कल कल की आवाज है करती
बहती झरनों से हूं,
धरा में जा समाई, खोई अपनी अस्तित्व हूं
हां फिर से आई बारिश ही हूं।
बंजर धरा धरा नही अब,
लह लहाते से फसल हैं,
नाचता देख मोर, मेढ़क टर्र टर्र कर रहें
डूबे आधे खेत
आसमान से आई बदलो से बनी हुई
बारिश ही हूं।

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