(वक्ता एक लंबी, सुनसान सड़क के किनारे अकेला खड़ा है। जूते घिस चुके हैं, साँसें भारी हैं, और आँखें उस क्षितिज पर टिकी हैं जो हर कदम के साथ और दूर होता जाता है।)
उन्होंने मुझसे कहा,
"तुमने काफ़ी कर लिया।"
उन्होंने कहा कि कर्तव्य वहीं समाप्त हो जाता है
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