(मंच मंद रोशनी में है। फ़र्श खाली, लगभग अधूरा सा दिखता है। वक्ता थोड़ी देर के लिए घुटनों के बल बैठता है, फ़र्श को छूता है, फिर उठ खड़ा होता है।)
शुरुआत की कोई सराहना नहीं करता।
वे केवल अंत की तारीफ करते हैं,
साफ़ रिबन,
...
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