(वक्ता अकेला खड़ा है। कंधों पर बोझ, साँस अस्थिर। चारों ओर ज़िम्मेदारियों के प्रतीक—काग़ज़, औज़ार, या बिखरी वस्तुएँ। बोलने से पहले लंबा मौन।)
मैं समझता था कि ताक़त का मतलब है हाँ कहना।
हर माँग के लिए—हाँ।
हर उम्मीद के लिए—हाँ।
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