बड़े सपने देखो (एक नाट्य-स्वगत) Poem by ashok jadhav

बड़े सपने देखो (एक नाट्य-स्वगत)

(मंच विस्तृत और मंद प्रकाश में डूबा है। पीछे क्षितिज-सी हल्की रोशनी चमक रही है, मानो कोई विशाल संभावना प्रतीक्षा कर रही हो। वक्ता मंच के मध्य खड़ा है—आँखें उठी हुईं, आकाश की ओर नहीं, बल्कि संभावनाओं की ओर।)
उन्होंने मुझसे कहा—
व्यावहारिक बनो।
उन्होंने यह बात
सलाह की तरह कही,
चिंता की तरह,
सुरक्षा की तरह।
पर मैंने कुछ और सुना।
मैंने सुना—
डर,
जो बुद्धिमत्ता का
वेश धारण किए था।
(ठहराव)
क्योंकि यथार्थ की सीमाएँ होती हैं,
और सपनों की—
कोई सीमा नहीं।
जिस क्षण मैंने कल्पना करना सीखा,
दुनिया मुझे छोटी लगने लगी।
इसलिए नहीं कि उसमें सौंदर्य कम था—
बल्कि इसलिए कि वह फुसफुसाती थी,
जहाँ हो, वहीं रुको।
मैंने इंकार किया।
(वह एक कदम आगे बढ़ता है।)
बड़े सपने देखना
अहंकार नहीं है।
यह भूख है—
दूसरों की अपेक्षाओं में
खुद को छोटा करने से इनकार।
यह वह साहस है
जो उस भविष्य की कल्पना करता है
जो अभी अस्तित्व में नहीं,
और कहता है—
मैं इसे बनाऊँगा।
(ठहराव)
मैंने ऊँचाइयों का सपना देखा
चढ़ना सीखने से पहले।
मैंने महासागरों का सपना देखा
तैरना सीखने से पहले।
मैंने विजय का सपना देखा
जब मेरे हाथ अभी खाली थे।
और वे हँसे।
वे हमेशा पहले हँसते हैं।
(स्वर कठोर हो जाता है।)
उन्होंने इसे असंभव कहा।
अव्यावहारिक।
बचकाना।
पर हर महान उपलब्धि
कभी न कभी
अव्यावहारिक कहलाई है।
(ठहराव)
बड़े सपने देखना
खतरनाक होता है।
यह निराशा को आमंत्रित करता है।
यह बड़े पैमाने पर
असफल होने का जोखिम लेता है।
छोटे सपने
चुपचाप टूटते हैं।
बड़े सपने
ज़ोर से बिखरते हैं।
पर टूटकर भी
वे अपने पीछे
इतने तीखे टुकड़े छोड़ जाते हैं
कि उनसे
एक जीवन गढ़ा जा सके।
(वह गहरी साँस लेता है।)
मैं असफल हुआ हूँ—
भव्य रूप से।
मैं अपने सपनों के खंडहरों में खड़ा हुआ,
और सोचता रहा
कि क्या कम लक्ष्य रखना
कम पीड़ा देता।
पर पछतावा यह नहीं पूछता—
तुम्हारा सपना कितना बड़ा था?
वह पूछता है—
तुमने विश्वास करना क्यों छोड़ दिया?
(ठहराव)
बड़े सपने देखना
खुले में जीना है।
दुनिया के सामने
अपनी आकांक्षा प्रकट करना
और उसकी उदासीनता का
जोखिम उठाना।
यह हर सुबह जागने का साहस है
यह जानते हुए
कि प्रयास
पहुंच की गारंटी नहीं देता।
और फिर भी
कोशिश चुनना।
(वह दूर देखता है।)
महान महत्वाकांक्षा
सफलता के बारे में नहीं है।
यह इनकार के बारे में है—
बिना प्रयास के
जीने से इनकार।
यह विश्वास है
कि क्षमता
एक उत्तरदायित्व है।
(ठहराव)
हर आगे बढ़ा कदम
विद्रोह जैसा लगा।
हर असफलता
इस बात का प्रमाण बनी
कि सपना जीवित है।
क्योंकि जो सपने
कभी असफल नहीं होते,
वे कभी महत्वाकांक्षी
होते ही नहीं।
(स्वर कोमल हो जाता है।)
ऐसी रातें भी आईं
जब संदेह
मेरे पास बैठ गया,
पूछता रहा
क्या इसकी कीमत उचित है।
जब थकान फुसफुसाई—
समझौता कर लो।
पर भीतर से
एक तेज़ आवाज़ आई—
अभी नहीं।
(ठहराव)
बड़े सपने देखना
विजय का वादा नहीं करता।
यह अर्थ का वादा करता है।
यह धैर्य सिखाता है,
विनम्रता,
और गिरकर
फिर उठने की शक्ति।
(वह प्रकाश में आगे बढ़ता है।)
मैं विशाल लक्ष्य के पीछे
गिरना पसंद करूँगा
बजाय इसके कि
छोटे सुरक्षित सपने की
रक्षा में खड़ा रहूँ।
क्योंकि महत्वाकांक्षा
आत्मा को विस्तार देती है
भले ही दुनिया विरोध करे।
(ठहराव)
तो हाँ—
मैं बड़े सपने देखता हूँ।
इसलिए नहीं कि
मुझे जीत का पूरा विश्वास है,
बल्कि इसलिए कि
छोटा जीवन जीना
इससे भी बड़ी हार होती।
(दीर्घ ठहराव)
उन्हें चेतावनी देने दो।
उन्हें संदेह करने दो।
उन्हें तुम्हारी दृष्टि को
अतार्किक कहने दो।
इतिहास
उन लोगों द्वारा लिखा जाता है
जिन्होंने
"समझदारी भरी सलाह"
को अनसुना किया।
(वह सिर उठाता है।)
बड़े सपने देखो—
तालियों के लिए नहीं,
मान्यता के लिए नहीं,
बल्कि इसलिए कि
तुम्हारी आत्मा
विस्तार चाहती है।
और अगर सपना
तुम्हें तोड़ भी दे—
तो वह तुम्हें
आगे की ओर
तोड़े।
(प्रकाश धीरे-धीरे मंद पड़ता है।)

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