(मंच अँधेरे में है। एक अकेली स्पॉटलाइट ऊँचाई पर खड़े वक्ता को रोशन करती है। वह ऊपर आकाश की ओर देख रहा है। हवा की हल्की-सी गूँज और सपनों की दूर की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। वह धीरे बोलना शुरू करता है, मानो रात के आकाश से संवाद कर रहा हो।)
उन्होंने मुझसे कहा—
"वास्तविक बनो।"
मानो वास्तविकता एक पिंजरा हो,
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