शीर्षक: एक कड़वी गोली निगलनी पड़ी
(वक्ता एक मंद रोशनी वाले कमरे में खड़ा है, अतीत की गूंज उसके चारों ओर है। उसकी आवाज़ क्रोध, शोक और अनिच्छित स्वीकारोक्ति के बीच झूलती है।)
कितनी निर्दयी है यह दुनिया, जो आपको वही सच देती है जिसे आप कभी देखना नहीं चाहते थे।
एक सच, इतना कठोर, इतना अकाट्य, कि इसका स्वाद राख और लोहे की तरह जीभ पर रह जाता है।
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