(मंच शांत है। संध्या की हल्की रोशनी फैली है। वक्ता अकेला खड़ा है, हाथ में कोई वस्तु—शायद एक पत्र, एक तस्वीर, या किसी इच्छा का प्रतीक। वह ऐसे बोलता है जैसे खामोशी से स्वीकारोक्ति कर रहा हो।)
लोग कहते हैं कि चाहत समय के साथ फीकी पड़ जाती है।
कि समय सबसे तीव्र इच्छा को भी कुंद कर देता है।
पर उन्होंने कभी उस दिल से मुलाक़ात नहीं की
जिसने अपनी दिशा तय कर ली हो
और पीछे मुड़ने से इनकार कर दिया हो।
(वह हाथ में पकड़ी वस्तु को देखता है।)
जिस क्षण मैंने इसे देखा—
आँखों से नहीं,
आत्मा से—
मैं समझ गया।
यह कोई साधारण इच्छा नहीं थी।
न कोई क्षणिक विचार।
यह था—
निश्चय का जड़ पकड़ लेना।
मैंने अपना दिल इसी पर अड़ा दिया है।
और जब दिल फ़ैसला कर ले,
तो तर्क केवल दर्शक बन जाता है।
(ठहराव)
क्या तुम जानते हो
एक अटल इच्छा का बोझ कितना भारी होता है?
यह हर जगह साथ चलती है।
यह खामोशी में बगल में बैठ जाती है।
यह तुमसे पहले जागती है
और थकान के जीतने पर ही सोती है।
लोगों ने मुझे चेताया।
उन्होंने कहा, "लचीले बनो।"
उन्होंने कहा, "इतना मत जकड़े रहो।"
उन्होंने कहा, "ज़िंदगी हमेशा वह नहीं देती जो तुम माँगते हो।"
पर दिल सौदेबाज़ी नहीं करता।
वह विकल्प स्वीकार नहीं करता।
वह समझौता नहीं करता।
(स्वर कड़ा हो जाता है।)
मैंने दूसरी ओर देखने की कोशिश की—
ख़ुद को समझाने की कोशिश की
कि कोई छोटी चीज़ भी काफ़ी होगी।
पर हर विकल्प खोखला लगा।
हर समझौता विश्वासघात जैसा लगा—
दूसरों से नहीं,
ख़ुद से।
क्योंकि जब दिल किसी एक पर अड़ा हो,
तो बाकी हर रास्ता गलत लगता है।
(वह आगे बढ़ता है।)
इस इच्छा ने मुझसे नींद छीनी है।
इसने मुझसे आराम छीना है।
इसने मुझसे ऐसे रिश्ते छीने हैं
जो एक सपने से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सके।
लोगों ने मुझे ज़िद्दी कहा।
आसक्त कहा।
अविवेकी कहा।
शायद मैं हूँ।
लेकिन बताओ—
क्या जुनून कभी विवेकपूर्ण होता है?
(धीरे स्वर में)
संशय के पल भी आए।
ऐसे पल जब लक्ष्य बहुत दूर लगा,
अपनी खामोशी में लगभग क्रूर।
ऐसे पल जब मैंने सोचा—
क्या दिल झूठ बोल सकता है?
क्या चाहत भटका सकती है?
लेकिन संदेह में भी,
वह चाह बनी रही।
अडिग।
अथक।
(वह ऊपर देखता है।)
मैंने इस लालसा को चुना नहीं।
इसने मुझे चुना।
आकाश में जमे सितारे की तरह,
जो हर कदम को दिशा देता है,
हर बलिदान को अर्थ देता है।
किसी चीज़ पर दिल अड़ा लेना
सफलता की गारंटी नहीं है।
यह अनिश्चितता के साथ
समर्पण स्वीकार करना है।
यह आगे बढ़ते रहना है
भले ही रास्ता अंत का वादा न करे।
(स्वर दृढ़ हो जाता है।)
मुझे पता है मैं असफल हो सकता हूँ।
मुझे पता है दुनिया मुझे ठुकरा सकती है।
पर मुझे यह भी पता है—
दिल की आवाज़ को अनसुना करके जी गई ज़िंदगी
एक और गहरी असफलता है।
क्योंकि दिल याद रखता है
वह सब जो दिमाग़ भूलने की कोशिश करता है।
और वह परित्याग को माफ़ नहीं करता।
(ठहराव। वह गहरी साँस लेता है।)
इसलिए मैं यहीं खड़ा हूँ।
केंद्रित।
अडिग।
अगर गिरूँगा,
तो कोशिश करते हुए गिरूँगा।
अगर हारूँगा,
तो ईमानदारी से हारूँगा।
(वह वस्तु को सीने से लगाता है।)
मेरा दिल अड़ा है।
और जब तक यह पूरा न हो जाए—
या पूरी तरह टूट न जाए—
मैं इसका पीछा करता रहूँगा।
क्योंकि कुछ इच्छाएँ
चुप कराए जाने के लिए नहीं होतीं।
वे जीने के लिए होती हैं।
(रोशनी धीरे-धीरे मंद पड़ती है। खामोशी छा जाती है।)
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