(मंच शांत है। संध्या की हल्की रोशनी फैली है। वक्ता अकेला खड़ा है, हाथ में कोई वस्तु—शायद एक पत्र, एक तस्वीर, या किसी इच्छा का प्रतीक। वह ऐसे बोलता है जैसे खामोशी से स्वीकारोक्ति कर रहा हो।)
लोग कहते हैं कि चाहत समय के साथ फीकी पड़ जाती है।
कि समय सबसे तीव्र इच्छा को भी कुंद कर देता है।
पर उन्होंने कभी उस दिल से मुलाक़ात नहीं की
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