📜 बाल कृष्ण मिश्रा | विचार और कविता 📜
शादी कोई रिश्ता नहीं...
एक अनवरत प्रबंधन प्रणाली है!
|| बीवी ही ब्रह्मांड है ||
बीवी ही ब्रह्मांड है, बाकी सब शमशान,
साँस जो लेने दे, वो भी उसकी खैरात
चुप रहना ही ठीक है, ये शमशान सी रात |
बहस करे सो मूर्ख है, मौन रहे सो समझदार
जीत सको ना जंग ये, कर लो कितने भी वार |
जो पत्नी के आगे झुका, उसी का बेड़ा पार
चुप रहने की कला ही, जीवन की है ढाल |
जो पत्नी से डर गया, वही रहा निहाल।
—
पत्नी से जीतने की कोशिश,
शेर से शाकाहार की उम्मीद जैसी है।
—
शादी दो ही तरह के लोग निभाते हैं,
एक जो चुप है,
दूसरा जो समझदार है,
और दोनों एक ही आदमी हैं।
~ बाल कृष्ण मिश्रा |
King of Hearts ✨
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