|| मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ✍️ ||
|| हिंदी काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
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उगता सूरज तिलक लगाता
उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा,
नतमस्तक हूँ तेरे चरणों में
तेरे चरणों में चारों धाम |
मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ||
तेरी माटी शीतल चंदन,
जिसमें खेले खुद रघुनन्दन ।
जिसमें कान्हा ने जन्म लिया,
कभी खाई, कभी लेप किया ।
सीता की मर्यादा यहाँ,
यहाँ मीरा का प्रेम |
मन के दर्पण का तू दर्शन
तेरे आँचल में संस्कृति का मान।
मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ||
कल कल करती नदियां
अपनी संगीत सुनाए।
चू चू करती चिड़िया
अपनी गीत सुनाए।
मातृभूमि की पावन धरा,
हर हृदय में प्रेम संजोए
काशी विश्वनाथ की आरती,
हर मन में दीप जलाए |
आध्यात्म की गहराई यहाँ
और विज्ञान की उड़ान |
मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ||
दिव्य अलौकिक अजर अमर
कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर |
बलिदानों की गाथा तू,
तू वीरों की पहचान |
जय-जय माँ भारती,
जय यह पवित्र धरा महान
मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ||
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✍️ रचनाकार -- बाल कृष्ण मिश्रा
🏠 स्थान -- नई दिल्ली
📧 ई-मेल -- [email protected]
Bal Krishna Mishra 🙏
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