हां तुम!
मैंने चाहा है तुमको
मेरी चाहतों में तुम I
गुजरे कल में तुम
उगते सूरज में तुम I
बहती हवाओं में तुम
बरसते बादलों में तुम I
खिलते फूलों में तुम
ढलती शामों में तुम I
हां तुम!
मन की सुंदरता
तन का सुंदर रूप I
लब तेरे मधुशाला
हर अंग पुष्प की माला I
स्वप्न की परी तुम
हो यौवन रस का अमृत प्याला I
हां तुम!
तुम जीवन ज्योति
तुम करुणा तुम भक्ति
तुम ही मेरा बंधन I
मेरा इश्क तुम
मेरी जान तुम
मेरा हर लम्हा तुमसे
तुम ही मेरा दर्पण I
हां तुम!
बेचैन दिल तन्हा मन
तस्वीर तेरी चूमते नयन I
मिलकर तुमसे लिपटूंँ मैं ऐसे
जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I
मेरा ख्वाब मेरी हकीकत
मेरी चाहत मेरा जूनू
हां तुम!
-बाल कृष्ण मिश्रा
मोबाइल: 8700462852
E-mail: [email protected]
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