पिता! Poem by Bal Krishna Mishra

पिता!

वो तप है, धर्म है, विवेक है, कर्म है
वो विद्या है, बुद्धि है, बल है, श्रम है ||

वो श्री है, शक्ति है, श्रेष्ठ है, संबल है,  
वो  जनक है,   पालक है, पोषक है 
वो जल, धरा, गगन,   वायु, अग्नि,
सूर्य, चंद्र है, वो  मेरे स्वर्ग हैं  ||

वो कर्तव्य है, प्रतिष्ठा है, उपासना है,
वो धन है, धर्म है, सुख है, प्रार्थना है
वो वेद है, उपनिषद है, भक्ति है
वो कृष्ण के श्लोक, राम की चौपाई है
         वो मेरे पिता  हैं ||


                 ~बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |
                  मोबाइल: 8700462852.
E-mail: [email protected]

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