माँ
जिसके रक्त से जीवन का सृजन है
जिनके श्रम से मिला जीवन को दर्शन ||
जिसकी भक्ति से मिली हमें शक्ति है
जिसके आशीष से बनती हमारी हस्ती ||
जिसने हमारी गलतियों पर हमें संभाला है
जो उपलब्धियां मिली तो हमें सराहा ||
जिसके चरणों में पाया हमने स्वर्ग है
जिसके होने से हमें गर्व है ||
जो भूल जाती है आज भी मेरी शिकायत
जिसके होने से है हमारी अहमियत ||
जिसने माना मेरी झूठ को हमेशा सच
जिसकी आंचल रही सदा रक्षा कवच ||
जो सुख मिलता है माँ मुझे तेरे सजदे में।
नहीं वो मंदिर मस्जिद गिरजा या गुरुद्वारे में ||
भूल कर भी न भूल पाऊं मैं कभी तुझे
बस छोड़ के न जाना माँ तुम मुझे ll
~ बाल कृष्ण मिश्रा |
मोबाइल: 8700462852.
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