Bete Ko Engineer Banana Hai (Hindi) Poem by S.D. TIWARI

Bete Ko Engineer Banana Hai (Hindi)

पापा ने ठाना है बेटे को इंजीनियर बनाना है
इंजीनियरिंग एंट्रेंस में बैठने कि गाडी चल पड़ी
जब एडमिशन नहीं हुआ, तंत्र मंत्र कि आड़ लिया
और थोडा जुगाड़ लगाया तो अपनी गाडी चल पड़ी
परिवार छोड़ हॉस्टल में रहा अकेला, रैगिंग भी झेला
शुरू में तो कैद सा लगा पर बाद में गाडी चल पड़ी
मेस का खाना रास न आता, माँ कि याद सताती रही
धीरे धीरे आदत पद गयी, फिर तो गाडी चल पड़ी
दिमाग से न निकला कूड़ा और कोर्स हो गया पूरा
दोस्तों ने मदद किया तो मुश्किल से गाडी चल पड़ी
सब सिर के ऊपर निकल जाता, सेमेस्टर में बैक लाता
अगले में मेहनत ज्यादा किया, जैसे तैसे गाडी चल पड़ी
यारों का ऐसा साथ मिला, पीछे का गम भूल गया
हंसते खेलते दिन ऐसे बीता, चलती गाड़ी दौड़ पड़ी
मुश्किल से कंपनी आयी, हम पर उसकी नीयत न आय़ी
मगर एग्जाम पास कर गए और गाडी चल पड़ी
डिग्री लेकर फिरते थे, अप्रोच पर दम भरते थे
नेता जी का जुगाड़ लगाया तब जाकर गाडी चल पड़ी
नौकरी हेतु रिज्यूमे बनाता पापा लड़की वालों को दे देते
अब तो अच्छे रिश्तों की भी अपनी गाडी चल पड़ी

Wednesday, January 22, 2014
Topic(s) of this poem: hindi
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