(मंच खाली, मंद रोशनी में डूबा। एक अकेला पात्र खड़ा है, कपड़े उलझे हुए, चेहरे पर थकान की लकीरें। चारों ओर युद्ध या संघर्ष के अवशेष—काग़ज़, टूटी हुई वस्तुएँ, महत्वाकांक्षा के बिखरे हुए संकेत। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और ज़मीन की ओर देखता है।)
मैंने नहीं सोचा था कि यह इस तरह खत्म होगा।
न तो सम्मान के साथ।
न किसी समारोह के साथ।
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