देखता हूँ निगाहों से
कभी कभी तुम सवेरे आया करो
मेरे दिल को बातों से बहलाया करो
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मेरी चिता को आग लगाएंगे धीर कानमे कहते जाएंगे भला मानस, पर कुछ कर नही पाया जाना तो सब को है पर जान नहीं पाया
Aasha Sharma Bahut shaandaar likha thank you Hasmukh Mehta ji