ध्रुपद धोखेबाज
ध्रुपद धोखेबाज! उतर आओ पालकी से!
गुलामी छोड़ दी है मैंने
एक उबाल उमड़ रहा है, जिस्म में
कमर से गर्दन तक।
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यह कोई मुफ़्त लंगर नहीं,
जहां चीनी थाल लिए, करो तुम
अपनी बारी का इंतज़ार।
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ओ अनछुए धन! आओ लिए अपनी साबुत मादकता
बेरोजगारों के मध्य, सब्जपोश तितली की तरह;
पैराशूट से झूलती, घंटियों का शोर, और
आरक्षियों द्वारा नज़रबंद, और मेरे पत्रों का दोषान्वेषण।
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स्वार्गिक स्वामी - बेड़ियों में कब तक?
उठ खड़ा होऊंगा, चारों पैरों पर, और
तोड़ दूंगा तुम्हारी गर्दन
चढ़, मक्के के ढेर पर, लहराऊंगा
अपने मेंहदी-सन केश, भूसे के मंच से, ओह,
ध्रुपद धोखेबाज! आ जाओ खुद से
वर्ना तुझे दिखाऊंगा मैं - नर्क - द्वार!
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अनुवाद - दिवाकर ए पी पाल
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