Ek Ardha Sarkari Prativedan (Hindi) Poem by Malay Roychoudhury

Ek Ardha Sarkari Prativedan (Hindi)

एक अर्ध सरकारी प्रतिवेदन
शस्त्रहीन सेना की प्रार्थना
चुल्लू भर पानी का मोल - 10 रुपए।
भूमिगत जल राशि का उद्गम - स्थल से विच्छेद
आदतन ईर्ष्या मिश्रित घृणा
कठोर शब्दों द्वारा सीमा पर प्रतिबंध
लोक निर्माण विभाग का पतन।
टमाटर के खेत में, हाथ में लेकर डाकबद्घ मत
पड़ा है, मौलिक मंथर मनुष्य, अंतहीन अपेक्षा में,
संसद के लिए महत्वाकांक्षी जूते
कहने दो उन्हें, कुछ भी - खाओ धोखे!
हुंह, जैसे धान के खेत डरते हों, शेर की दहाड़ से
कृषक कन्या आज मंत्रालय में बैठी है।
फुटबॉल के मैदान के कोने में, लगी एक सीधी चोट से हुई
पुत्र की मृत्यु पर, शोकाकुल है - एक थका, डरपोक इंसान।
स्वतंत्रता संग्राम की समस्या का हल
अंकित है - मृतक के माथे पर - एक अकाट्य सत्य!

Friday, January 31, 2020
Topic(s) of this poem: hindi
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