Fauji (फौजी) Poem by Ojaswani Sharma

Fauji (फौजी)

Rating: 5.0

'वतन के लिए जंग में जाते वक्त एक जवान के मन के भाव अपने परिवार के लिए इस कविता द्वारा'-

चल पड़ा हूँ लड़ने देश के लिए मैं जंग,
माँ, होगी दिल में तू हर पल मेरे संग,

जब खून की होली सरहद पर खेली जाएगी,
पापा, तब आपकी प्यार वाली डाँट याद आएगी,

भूलकर सब जंग के लिए मैं तैयार हो जाऊँगा,
बहन, पर तेरे से किया हर वादा मैं निभाऊँगा,

पता नहीं मुझको कि क्या लिखा है जिंदगी में कल,
प्रिय, रहोगी दिल में मेरे तुम हर पल,

चली जाए अगर वहाँ वतन के लिए मेरी जान,
बच्चों, बनाए रखना तुम सदैव घर का मान,

भारत माँ के पुत्र होने का फर्ज बखूबी निभाऊँगा,
चलकर ना सही तो तिरंगे में लिपटकर वापस जरूर आऊँगा

Friday, August 25, 2017
Topic(s) of this poem: military
COMMENTS OF THE POEM
ashu singh 14 February 2019

dil ko chu gai tq ji

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Jazib Kamalvi 14 August 2018

Seems A good start with a nice poem, ojaswani. You may like to read my poem, Love And Iust. Thank you.

0 0 Reply
Ananya Bharti 27 August 2017

बहुत खूब ओजस्वनी जी

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Ojaswani Sharma 27 August 2017

धन्यवाद

1 0 Reply
Rajnish Manga 25 August 2017

भारत माँ के पुत्र होने का फर्ज बखूबी निभाऊँगा, चलकर ना सही तो तिरंगे में लिपटकर वापस जरूर आऊँगा.... //.... देशभक्तिपूर्ण कविता. बहुत सुंदर. आपका स्वागत है.

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