✨मौसम को भी बदलने की आज़माइश है⛈️
🗣️कुछ लफ़्ज़ों से तुम्हारी तारीफ करने की ख्वाईश है।👩🦰
🕺आज मिज़ाज़ मेरा खुशनुमा सा है
...
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आज हवाओं की ठंढक और मीठी हो गईं है कहीं तुम छत्त पर आ रही हो क्या? .... मुरझाए फूल भी खिलने लगे है कहीं तुम मुस्कुरा रही हो क्या? .... //.... अद्वितीय कविता. प्रेमिका की सुंदरता और उसके बहुआयामी प्रभाव का कैसा आकर्षक चित्रण है. धन्यवाद, मुकुंद जी.
बहुत बहुत शुक्रिया मुझे ये सुन कर बहुत अछा लगा कि आप जैसे वरिष्ठ कवि को इस छोटे से कवि की कविता पसंद आई आप हमेसा ही मेरा उत्साह बढ़ते है उसके लिए तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया
Very very beautiful 😍😍😍😍😍😍😍😍😍
थैंक यू सो मुच्