Grandpa By Rahul Verma (Rv) Poem by Rahul verma (Rv)

Grandpa By Rahul Verma (Rv)

पौधा अच्छे से उग नहीं सकता, बिना खाद
याद आता है मुझे आपके हाथो से खिलाए खाने का स्वाद,
निकल चुका हुआ जीवन के सफर पर होने आबाद
बस बची यही मेरी आखिरी मुराद
काश फिर से मिल पाता आपका आशीर्वाद।

© Rahul verma (Rv)

Grandpa By Rahul Verma (Rv)
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I write poem for my granda.
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